उत्तराखंड की संस्कृति

गढ़वाले की रुपरेखा

परिचय: गढ़वाल 2000 ई में अस्तित्व मा ऐ छो, जेमा उत्तरांचल की गोद नवगठित राज्य का रूप मा निहित हुवे। यू उत्तर प्रदेश कू एक हिस्सा छायू, यू तिब्बत,कुमांऊ ,उत्तर प्रदेश,हिमाचल प्रदेश की सीमा बट्टी जुडून चा,उत्तराँचल बट्टी की ही गंगा,यमुना,अलकनंदा और मन्दाकिनी जन गाडों को जन्म हुंदा |

गढ़वाल पूरा एशिया मा एक सुन्दर भूमि का रूप मा स्थित चा |

उत्तरंचल जो चा वू चमोली,देहरादून,पौड़ी,टिहरी,उत्तरकाशी,हरिद्वार और रुद्रप्रयाग जन जिलों बट्टी मिलकर बदूं चा,(पौड़ी और चमोली पेली एक ही हिस्सा छायो) ।गढ़वाल मा कुल ६ हजार का लगभग लोग यूं जिलों मा रोंदिन। ऊमा लगभग ८०℅ लोग गढ़वाली भाषा ते बुल्दिना।लगभग १२००० गऊं छिना ।ऊंचा पहाड़ी गऊं मा जांणू कू मात्र खच्चर ही एक ज़रिया चा। कई इंद्रा गऊं छिना जू एक साल मा चार मैना बर्फ ला ढकया रौन्दिना । ये कारण भी सुसमाचार ते उख तक पहुचाण मा थोडा मुश्किल हुंदा।

हिमालय गढ़वाले की सबसे आध्यात्मिक और पवित्र भूमि मानेजंदा । जखा बद्रीनाथ और केदारनाथ जन पवित्र मन्दिर स्थित छिन , यू इखकी मुख्य केन्द्र भूमि चा, हरिद्वार और ऋषिकेश भी हिन्दू धर्म कू गेरू अध्ययन को क्षेत्र मा आन्दु, ऋषिकेश मा योग को भी केन्द्र चा जू उतर भारत का लुखूं ते इखा आणु ते प्रभावित और आकर्षित करदा। ये का अलावा हिंदू , सिखों और बौद्धों का सैकड़ो प्राचीन धार्मिक महत्व का धार्मिक स्थल ईख दिख्णु कू मिलदिना भारत मा गढ़वाल हिंदूं की सबसे पवित्र गाड़ों गंगा और यमुना कू भी स्रोत चा।

गढ़वाले की जातीय समूहों के आनुपातिक वितरण मूडी चा:

वर्ग / जाति / कुल के जातीय समूह%

प्रतिशत

ब्राह्मणों

25%

राजपूतों

55%

दलित

10%

जनजातीय

5%

दूसरों को

5%

कुल

100%